पवित्र आत्मा“अपने जीभ से बोलती हुई पवित्र आत्माओं का स्वागत करना स्वर्गलोक में उत्तराधिकार प्राप्त करने की प्रतिभूति है।”

“जल से शुद्धिकरण अपराधों से क्षमा तथा पुनर्जीवन के लिए है । शुद्धिकरण प्राकृतिक जल में ही होना चाहिए, जैसे कि नदी, सागर या झरने में । जिसका शुद्धिकरण जल तथा पवित्र आत्मा के साथ हो चुका है, यह संस्कार भगवान यीशु के नाम से करेगा । जिसका शुद्धिकरण हो रहा हो उसे जल में पूर्णतया समाना होगा तथा वह सामने की ओर नतमस्तक होगा ।”

“चरण धोने का संस्कार प्रभु ईशु से सम्बंधित होने की योग्यता प्रदान करती है। यह इस बात का स्मरण कराने का कार्य भी करती है कि हर किसी के पास प्रेम, पवित्रता, नम्रता, क्षमाशीलता तथा सेवाभाव के गुण होने चाहिये। उस प्रत्येक व्यक्ति को जिसे कि बपतिस्मा जल की प्राप्ति हुई हो प्रभु ईशु के नाम पर चरण अवश्य धोने चाहिये। दृढ़ संकल्प के साथ परस्पर चरण धोने का अभ्यास किया जा सकता है।”

“पवित्र समागम भगवान यीशु की मृत्यु की याद में मनाया जाता है । यह हमें अपने ईश्वर के अंग बनने की क्षमता प्रदान करता है, ताकि हमारा जीवन अनन्तकाल तक बना रहे और क़यामत के दिन हमारी आत्मा परलौकिक हो जाय । यह संस्कार जितनी अधिक आवृति के साथ संभव हो, होना चाहिए तथा केवल खमीररहित रोटी तथा अंगूर का रस ही प्रयुक्त होना चाहिए ।”

“विश्राम दिवस, सप्ताह का सातवाँ दिन (शनिवार), पवित्र दिन होता है जिसे कि ईश्वर की पवित्रता तथा आशीर्वाद प्राप्त है। इस दिन को ईश्वर कृति (संसार) से मुक्ति पाने के लिये प्रभु के आशीर्वाद एवं जीवन में शाश्वत विश्राम प्राप्त करने की आशा के रूप में देखना चाहिये।”

http://newbornchurch.sulekha.com/blog/post/2008/10/-5.htm